वो “वैश्या” है क्योंकि उसका “पॉर्न” वेबसाइट पर है।

प्यार क्या है उसे समझना तो काफी मुश्किल है मगर आजकल हमारे युग के युवा प्रेम के नाम पर गुमराह हो जाते है और ऐसी स्तिथि में सबसे ज्यादा नुक्सान लड़कियों का होता है। अगर आप प्रचलित पॉर्न वेबसाइटों, पोर्टलों पर धयान डालें तो पता चलेगा रोज़ हजारों न्यूड फ़ोटोज़ और विडियोज़ अपलोड की जाती है और इनमे से 95% लड़कियों की होती है।

विज्ञान की तरक्की में प्रेम करने के भी नए तरीके इजाद हुए है। कई बार तो लड़का लड़की एक दूसरेे के साथ रिश्ते में आ जाते है बिना कभी आमने सामने मिले। खैर, यह तो निजी पसंद है और मुझे इन सब तरीकों से कोई तकलीफ नहीं है। मगर आज का प्रेम दरअसल प्रेम है या बस हवस यह जान समझ लेना बहुत ज़रूरी है, खासकर लड़किओं को।

हर प्रेम रिश्ते में एक हनी मून पीरियड होता है जहाँ प्रेमी और प्रेमिका को लगता है उनका प्रेम रोमियो जूलिएट वाला अमर प्रेम है। दोनों को हर चीज़ नया और ख़ास लगने लगता है। दोनों एक दूसरे से सुबह शाम बातें, अपने सुख दुःख बाँटते है। ऐसे में एक वक़्त के बाद दोनों इतने करीब आ जाते है कि सेक्सटिंग और नयूडस की शेयरिंग होने लगती है। बहुत कॉमन सी बात यह आज कल और इससे किसी को कोई ऐतराज़ नहीं होना चाहिए क्युकि यह दो लोगों के बीच के रिश्ते, इंटीमेसी और प्राइवेसी है।

कुछ वक़्त और बीतने के बाद जब चीज़े साधारण होने लगती है और आकर्षण कम होने लगता है तब प्यार की ताकत का अंदाज़ा लगता है। बहुत बार चीज़े ना बन पाने और आपसी टकरार के कारण ब्रेकअप हो जाता है और दो नए रास्ते खोल देता है। पहला, दोनों आपस में चीज़ों का समझौता कर अलग हो जाए और दूसरा, ब्रेकअप को अपनी हर मानना।

ब्रेकअप को हार मानने वाली प्रवृत्ति सबसे ज्यादा मर्दों में होती है क्योंकि हम एक ऐसे समाज का हिस्सा है जहाँ लड़कों को शक्तिशाली और श्रेष्ठ माना जाता है। जब ऐसा होता है तो लड़के कई बार उन पुराने चित्रों को पब्लिक कर देने की धमकी, चित्रों को दोबारा भेजकर सेक्स की मांग जैसे घिनौने काम करते है।

लड़की को टॉर्चर किया जाता है और अगर वो प्रतिवाद करे तो चित्रों को साइट्स, पोर्टल्स पर अपलोड कर दिया जाता है। लड़के को लगता है यह एक तरीका का बदला है क्योंकि समाज उसे एक मुजरिम नहीं एक वीर के रूप में देखता है और लड़की को एक शिकार नहीं चरित्रहीन वैश्या के रूप में देखता है।

समाज को बदलना मुश्किल है यह मैं भी जानता हूँ और आप भी। जो सोच समाज हज़ारों सालों से पाले हुए है उसे एकाएक नहीं बदला जा सकता, क्रांति नहीं लाई जा सकती तो बेहतर यह है कि आप सतर्क रहे।

मैं यहाँ चित्रों के आदान प्रदान पर रोक लगाने की तरफ नहीं हूँ, यह आपका निजी निर्णय है। इस लेख का लक्ष्य सिर्फ सतर्क करना है, समाज की सोच को आपतक पहुँचाना है ताकि मेरी दोस्त के साथ जो हुआ वो किसी और के साथ ना होने पाए।

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